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पॉसम की खाल का लबादा असल में कहाँ से है?
पॉसम की खाल का लबादा दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया से आया है, आज के विक्टोरिया, न्यू साउथ वेल्स और साउथ ऑस्ट्रेलिया से। वहाँ के आदिवासी लोग दर्जनों पॉसम खालें सिलकर गर्म, बारिश से बचाने वाले लबादे बनाते थे और खाल पर अपने कबीले और अपनी धरती की कहानी उकेरते थे।
खालें, नसें और गेरू
लबादे वहाँ बनाए जाते थे जहाँ सर्दियाँ ठंडी होतीं और पॉसम बहुतायत में मिलते। बनाने वाले कंगारू की नस से खालें सिलते और खाल वाली तरफ़ डिज़ाइन काटकर उकेरते। ये डिज़ाइन कबीले की पहचान, जानवर, पौधे और धरती की बनावट दिखाते थे। फिर लबादे पर राल, गेरू और चर्बी का मिश्रण रगड़ा जाता, जो उसे सजाता भी और बचाता भी। लबादे कंबल, गद्दे और बच्चों को लपेटने के कपड़े का काम भी करते थे, और विरासत के रूप में आगे सौंपे जाते थे।
गिने-चुने बचे, नए बने
1830 से पहले इस इलाक़े में लगभग हर व्यक्ति के पास अपना लबादा होता था। बाशिंदे भी इन्हें क़ीमती मानते थे, पर जैसे-जैसे आदिवासी लोगों से उनकी ज़मीन छिनी और उन्हें बदले में कम जलरोधी कंबल दिए गए, 19वीं सदी के आख़िर में लबादे बनाने की कला ख़त्म हो गई। लबादे नाज़ुक होते हैं और अक्सर अपने मालिकों के साथ दफ़ना दिए जाते थे, इसलिए गिने-चुने ही बचे हैं, जिनमें 1853 में इकट्ठा किया गया एक योर्टा योर्टा लबादा और लेक कोंडा से 1872 में इकट्ठा किया गया एक गुंडितजमारा लबादा शामिल हैं। 1999 में आदिवासी महिलाओं ने इन्हीं से यह हुनर फिर से सीखना शुरू किया।
लोगों को कनाडा क्यों याद आता है
फ़र के कपड़े ठंडे उत्तर और कनाडा की याद दिलाते हैं, जहाँ 16वीं से 19वीं सदी के बीच यूरोपीय बाशिंदों और फ़र्स्ट नेशंस लोगों के बीच फ़र का व्यापार अटलांटिक से प्रशांत तट तक फैला। पर सुदूर दक्षिण में भी फ़र लोगों को गर्म रखता था। दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया की सर्दियाँ ठंडी और गीली होती हैं, और वहाँ के लोग हज़ारों सालों से लबादे बनाते आए हैं। 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन में बुज़ुर्गों के नए लबादे पहनने के बाद से विक्टोरिया, न्यू साउथ वेल्स और साउथ ऑस्ट्रेलिया में लबादा बनाने की कार्यशालाएँ फैल गई हैं।
स्रोत: en.wikipedia.org › Possum skin cloak ↗ · web.archive.org › display ↗ · web.archive.org › possum skin cloaks ↗ · smithsonianmag.com ↗ · en.wikipedia.org › North American fur trade ↗