सुडोकू असल में कहाँ से है?
सुडोकू अमेरिका के इंडियाना से आया है। आधुनिक पहेली संभवतः इंडियानापोलिस के सेवानिवृत्त आर्किटेक्ट हॉवर्ड गार्न्स ने बनाई थी, और यह पहली बार 1979 में अमेरिका की एक Dell पहेली-पत्रिका में ‘Number Place’ नाम से छपी।
बिना नाम वाली पहेली
Dell Pencil Puzzles and Word Games ने मई 1979 से Number Place को उसके रचयिता का नाम दिए बिना छापा। कॉनर्सविल, इंडियाना में 1905 में जन्मे गार्न्स तब 74 साल के थे और फ़्रीलांस पहेली-निर्माता थे। इंडियानापोलिस की डैगेट आर्किटेक्चर फ़र्म में उनके सहकर्मियों को बाद में याद आया कि वे एक ख़ाली ड्रॉइंग बोर्ड पर किसी गुप्त ‘खेल’ पर काम करते थे: वह क्रॉसवर्ड जैसा दिखता था, पर छोटे ख़ानों में अंक होते थे। 1989 में उनकी मौत हो गई, उनकी पहेली के दुनिया भर में धूम मचाने से बरसों पहले।
जापान ने दिया नाम
अप्रैल 1984 में जापानी पहेली कंपनी निकोली के अध्यक्ष माकी काजी ने यह पहेली जापान में Sūji wa dokushin ni kagiru नाम से पेश की, यानी ‘अंक अकेले ही रहें’; BBC के अनुसार उन्हें यह Dell की अमेरिकी पहेली-किताबों में मिली थी। 1986 में उन्होंने नाम छोटा करके sudoku कर दिया, यानी ‘अंक-अकेला’। दो दशक बाद यह दुनिया भर में फैल गई: वेन गूल्ड, जिन्होंने ये पहेलियाँ बनाने के लिए एक कंप्यूटर प्रोग्राम लिखा था, ने नवंबर 2004 में लंदन के The Times को इन्हें छापने के लिए राज़ी किया।
लोग जापान क्यों सोचते हैं
नाम जापानी है, और जापान ने ही इस पहेली को पहले लोकप्रिय बनाया, इसलिए बहुत लोग मानते हैं कि यह वहीं जन्मी। पर नौ पंक्तियों, नौ स्तंभों और 3×3 के नौ ख़ानों वाला यह ग्रिड पाँच साल पहले एक अमेरिकी पत्रिका में आ चुका था। 2005 में न्यूयॉर्क टाइम्स के पहेली संपादक विल शॉर्ट्ज़ ने इसका सूत्र गार्न्स तक खोज निकाला: जब-जब Number Place छपती, Dell के योगदानकर्ताओं की सूची में उनका नाम हमेशा होता, और बाक़ी समय कभी नहीं। फ़्रांसीसी अख़बारों ने 1890 के दशक में ऐसी ही अंक-पहेलियाँ छापी थीं।
स्रोत: en.wikipedia.org › Sudoku ↗ · en.wikipedia.org › Howard Garns ↗ · content.time.com ↗