फ़्रैंकलिन स्टोव असल में कहाँ से है?
फ़्रैंकलिन स्टोव फ़िलाडेल्फ़िया से आया है, जहाँ बेंजामिन फ़्रैंकलिन ने लोहे की एक ‘पेन्सिलवेनिया अँगीठी’ बनाई, ताकि कम लकड़ी जलाकर कमरा बेहतर गर्म हो। पेटेंट की पेशकश होने पर उन्होंने उसके बजाय सबको इसकी नकल करने की छूट देना चुना।
आग के पीछे गर्म हवा का बक्सा
फ़्रैंकलिन ने चेताया कि उत्तरी उपनिवेशों में ईंधन महँगा होता जा रहा है: कुछ क़स्बे अब लगभग 100 मील दूर से लकड़ी मँगाते थे, और जैसे-जैसे देश में जंगल साफ़ होंगे और बस्तियाँ बसेंगी, लकड़ी और कम और महँगी होती जाएगी। खुली अँगीठियाँ अपनी बहुत-सी गर्मी चिमनी से ऊपर भेज देती थीं। फ़्रैंकलिन का हल था अँगीठी के चूल्हे में बिठाया गया लोहे का एक बक्सा। आग के पीछे एक खोखला हवा-बक्सा था: ताज़ी हवा नीचे से अंदर आती, गर्म होती, और ऊपर के पास बने छेदों से कमरे में बहती, जबकि धुएँ को चिमनी तक जाने के लिए उसके चारों ओर घूमकर जाना पड़ता।
पेन्सिलवेनिया की एक भट्ठी में ढला
फ़्रैंकलिन की आत्मकथा इस आविष्कार को 1742 का बताती है, पर उनके काग़ज़ात के संपादक 1739–40 की सर्दियों को ज़्यादा संभव मानते हैं, और फ़िलाडेल्फ़िया का एक अख़बार दिसंबर 1741 में ही ‘नई ईजाद की गई अँगीठियों’ का विज्ञापन दे रहा था। उनके दोस्त रॉबर्ट ग्रेस ने चेस्टर काउंटी की वॉरविक फ़र्नेस में लोहे की प्लेटें ढालीं। 1744 में फ़्रैंकलिन ने एक पुस्तिका छापी, जिसमें बताया गया कि ये कैसे काम करती हैं। नलियों में हवा गर्म करने का विचार उन्होंने फ़्रांसीसी निकोला गोज़े से लिया था, जैसा कि उन्होंने ख़ुद बताया।
पेटेंट के बजाय तोहफ़ा
पेन्सिलवेनिया के गवर्नर जॉर्ज थॉमस को पुस्तिका में बताया गया डिज़ाइन इतना पसंद आया कि उन्होंने फ़्रैंकलिन को इन अँगीठियों की एकमात्र बिक्री का पेटेंट देने की पेशकश की। फ़्रैंकलिन ने मना कर दिया। उन्होंने समझाया कि जब हम दूसरों के आविष्कारों से बड़े फ़ायदे उठाते हैं, तो ‘हमें अपने किसी भी आविष्कार से दूसरों की सेवा करने के मौक़े पर ख़ुश होना चाहिए, और यह हमें मुक्त और उदार भाव से करना चाहिए’। जल्द ही दूसरे लोहा-व्यापारी उनका डिज़ाइन बनाने और बेचने लगे। फ़्रैंकलिन ने आगे चलकर कुल पाँच हीटर डिज़ाइन किए, जिनमें आख़िरी वाले कोयले से जलते थे।
स्रोत: en.wikipedia.org ↗ · founders.archives.gov ↗ · harvardmagazine.com ↗