कोई (सजावटी कार्प मछली) असल में कहाँ से है?
कोई मछलियाँ जापान के निईगाता के बर्फ़ीले पहाड़ी गाँवों से आई हैं। 19वीं सदी की शुरुआत में यामाकोशी और ओजिया के आसपास खाने के लिए कार्प पालने वाले किसानों ने उनमें से अजीब रंग वाली मछलियों का प्रजनन शुरू किया, और उनकी बनाई ज़री जैसी रंगीन मछलियाँ आज दुनिया भर के बग़ीचों के तालाबों में तैरती हैं।
बर्फ़ में घिरे गाँवों का सर्दियों का भोजन
इस इलाक़े को Nijūmuragō, यानी ‘बीस गाँव’, कहा जाता था। भारी बर्फ़ इसे महीनों तक बाक़ी दुनिया से काट देती थी, इसलिए किसान सर्दियों में प्रोटीन के स्रोत के रूप में काली कार्प पालते थे, अपने सीढ़ीदार धान के खेतों के पास के तालाबों में, और सर्दियों में अपने खेतिहर घरों के पास के तालाबों में। बुनका और बुनसेई काल (1804–1830) में उन्होंने काली के साथ-साथ लाल और सफ़ेद कार्प भी पालीं और उनका संकरण करके लाल-सफ़ेद मछलियाँ पैदा कीं। 1820 के दशक तक वहाँ सजावटी कार्प का व्यवस्थित प्रजनन शुरू हो चुका था।
टोक्यो में रजत पदक
लगभग 1875 में रंगीन कोई लोकप्रिय हुईं और कुछ ऊँचे दामों पर बिकीं। निईगाता प्रान्त ने इनके प्रजनन को सट्टेबाज़ी का धंधा मानकर कुछ समय के लिए रोक लगा दी, लेकिन गाँववालों की अर्ज़ी के बाद रोक हटा ली। 1914 में हिगाशियामा और ताकेज़ावा के प्रजनकों ने अपनी मछलियाँ उएनो पार्क में टोक्यो ताइशो प्रदर्शनी में दिखाईं। इन्हें टोक्यो के आसपास देखी गई अपनी तरह की पहली मछलियाँ बताया गया, और इन्होंने रजत पदक जीता। प्रदर्शनी ने नए बाज़ार खोले, और कोई के दाम आसमान छूने लगे।
लोग चीन क्यों कहते हैं
कार्प को सबसे पहले चीन में पालतू बनाया गया, जहाँ कम से कम 5वीं सदी ईसा पूर्व से अमूर कार्प को खाने के लिए पाला जाता था, और चौथी सदी की एक चीनी किताब में लाल, नीली, काली, सफ़ेद और पीली कार्प का वर्णन मिलता है। माना जाता है कि वे एक रंग की मछलियाँ संयोग से हुए उत्परिवर्तन थीं, नस्लें नहीं। धब्बेदार नस्लें निईगाता में बनीं: Kōhaku और Taishō Sanshoku 1917 में नस्ल के रूप में स्थिर हुईं, और Shōwa Sanshoku 1927 में।
स्रोत: en.wikipedia.org ↗ · nippon.com ↗