कॉफ़ी (पेय) असल में कहाँ से है?
पेय के रूप में कॉफ़ी यमन से आई है। कॉफ़ी का पौधा इथियोपिया के जंगलों में जंगली उगता है, लेकिन 15वीं सदी में यमन में ही लोगों ने इसके बीज भूनकर पेय बनाना और इसे फ़सल के रूप में उगाना शुरू किया, और दो सदियों तक दुनिया की कॉफ़ी वहीं से आती रही।
यमन में भूनी और बनाई गई
15वीं सदी से पहले कॉफ़ी पीने का कोई पक्का सबूत नहीं है। उस सदी के आख़िर तक यमन में यह सूफ़ी समुदायों के बीच अच्छी तरह जम चुकी थी, जो लंबी रातों में जागते रहने के लिए इसे पीते थे। 1587 में लेखक अल-जज़ीरी ने अदन के जमालुद्दीन अल-ज़बहानी को, जिनकी मृत्यु 1470 में हुई, लगभग 1454 में इसे सबसे पहले अपनाने का श्रेय दिया। यमन ही वह जगह भी थी जहाँ Coffea arabica को पहली बार बड़े पैमाने पर फ़सल के रूप में उगाया गया, पश्चिमी पहाड़ी इलाक़ों की सीढ़ीदार ढलानों पर।
मोखा, इकलौता दरवाज़ा
यमन से कॉफ़ी मक्का पहुँची और 16वीं सदी की शुरुआत में क़ाहिरा, फिर आगे दमिश्क और इस्तांबुल, जहाँ 1554 में पहला क़हवाख़ाना खुला। कारवाँ बीजों को लाल सागर के बंदरगाहों तक ले जाते थे, सबसे बढ़कर मोखा तक, और 17वीं सदी के अंत तक मोखा दुनिया में कॉफ़ी का इकलौता दरवाज़ा था। यूरोपीय भी वहीं से ख़रीदते थे: 1616 में डच व्यापारी पीटर फ़ान डेन ब्रुक मोखा से कॉफ़ी के पौधे एम्स्टर्डम ले गए, और बाद में डचों ने सीलोन और जावा में कॉफ़ी उगाई।
लोग इथियोपिया या ब्राज़ील क्यों कहते हैं
दोनों अनुमान क़रीब हैं। इथियोपिया इस पौधे का घर है: जंगली Coffea arabica उसके प्राकृतिक जंगलों में उगता है। ब्राज़ील आज का दिग्गज है। 1727 में फ़्रांसिस्को द मेलो पालेता फ़्रेंच गयाना से चोरी-छिपे बीज ब्राज़ील ले आए, और 1852 तक ब्राज़ील दुनिया का सबसे बड़ा कॉफ़ी उत्पादक बन गया, जो वह आज भी है। लेकिन पेय, और फ़सल, की शुरुआत यमन में हुई: आज उगाई जाने वाली लगभग सारी अरेबिका वहाँ उगाए गए पौधों की वंशज है।
स्रोत: en.wikipedia.org ↗ · pmc.ncbi.nlm.nih.gov ↗