शुगर बीट (चीनी वाला चुकंदर) असल में कहाँ से है?
शुगर बीट प्रशा से आया है, बर्लिन और सिलेसिया से। वहाँ 18वीं सदी में एक रसायनज्ञ ने चुकंदर में चीनी खोजी और उनके शिष्य ने ऐसा चुकंदर विकसित करना शुरू किया जिसमें इतनी चीनी हो कि उसे साफ़ करके चीनी बनाना फ़ायदेमंद रहे। आज दुनिया की लगभग पाँचवें हिस्से जितनी चीनी चुकंदर से आती है।
बर्लिन की एक प्रयोगशाला में चीनी
चुकंदर लंबे समय से सब्ज़ी और पशु-चारे के रूप में उगाया जाता था। 1747 में बर्लिन की विज्ञान अकादमी के रसायनज्ञ आंद्रेयास ज़िगिसमुंड मार्गग्राफ़ ने चुकंदर से चीनी अलग की और दिखाया कि यह गन्ने से बनी चीनी जैसी ही है। उनके चुकंदरों में सिर्फ़ 1.3 से 1.6% चीनी थी, और उनमें सबसे अच्छा सफ़ेद चुकंदर था। मार्गग्राफ़ ने अपनी खोज की आर्थिक संभावना पहचानी, पर उसे आगे नहीं बढ़ाया, और इससे व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं हुआ।
आशार का चुकंदर और कारख़ाना
उनके शिष्य फ़्रांज़ कार्ल आशार ने यह काम आगे बढ़ाया। 1780 के दशक से, पहले बर्लिन के पास काउल्सडॉर्फ़ में अपनी जागीर पर, उन्होंने चुकंदर की 23 किस्में परखीं और हाल्बरश्टाट की एक नस्ल चुनी। उसी से मोरित्ज़ फ़ॉन कोप्पी और उनके बेटे ने सफ़ेद, शंकु जैसी जड़ें चुनीं: ‘व्हाइट सिलेसियन’ शुगर बीट, जो आज के सभी शुगर बीटों का पूर्वज है। 1801 में राजा फ़्रेडरिक विलियम तृतीय की मदद से आशार ने सिलेसिया के कुनर्न में, जो आज पोलैंड का कोनारी है, दुनिया का पहला चुकंदर-चीनी कारख़ाना लगाया, और 1802 में उसमें चुकंदर की प्रोसेसिंग शुरू हुई।
लोगों को फ़्रांस क्यों याद आता है
फ़्रांस ने चुकंदर-चीनी को बड़ा उद्योग बनाया। नेपोलियन के युद्धों के दौरान ब्रिटिश नाकेबंदी ने फ़्रांसीसी साम्राज्य को वेस्ट इंडीज़ की गन्ने की चीनी से काट दिया, और 1811 में नेपोलियन ने यह नई विधि अपनाई; उनके असर में फ़्रांस में चुकंदर-चीनी के 40 कारख़ाने खुले। उनके पतन के बाद यह उद्योग कुछ समय के लिए ढह गया, पर 1840 के दशक में फिर उभरा, और 1880 तक चुकंदर-चीनी टन के हिसाब से गन्ने की चीनी से आगे निकल गई। पर चुकंदर और पहला कारख़ाना प्रशा के थे।
स्रोत: en.wikipedia.org › Sugar beet ↗ · en.wikipedia.org › Franz Karl Achard ↗ · en.wikipedia.org › Andreas Sigismund Marggraf ↗ · britannica.com ↗ · de.wikipedia.org ↗