टी ट्री (टी ट्री तेल का स्रोत) असल में कहाँ से है?
टी ट्री पूर्वी ऑस्ट्रेलिया से आया है, जहाँ यह उत्तरी न्यू साउथ वेल्स और दक्षिण-पूर्वी क्वींसलैंड में धाराओं के किनारे और दलदली समतलों पर जंगली उगता है। यह एक मर्टल है, पीने वाली चाय देने वाले पौधे का कोई रिश्तेदार नहीं, और इसकी पत्तियों के आसवन से टी ट्री तेल बनता है।
दलदलों का एक मर्टल
Melaleuca alternifolia एक ऊँची झाड़ी या छोटा पेड़ है, जो लगभग 7 मीटर तक ऊँचा होता है और जिसकी छाल सफ़ेद-सी और काग़ज़ जैसी होती है। इसकी नरम, सँकरी पत्तियाँ 10 से 35 मिलीमीटर लंबी और लगभग 1 मिलीमीटर चौड़ी होती हैं, जिन पर तेल-ग्रंथियों के बिंदु होते हैं, और वसंत में यह सफ़ेद फूलों की रोएँदार मंजरियों से ढक जाता है। यह सिर्फ़ ऑस्ट्रेलिया में, तट पर और पास की पर्वत-श्रेणियों में, न्यू साउथ वेल्स के ग्राफ़्टन के आसपास से उत्तर में क्वींसलैंड तक उगता है, और जहाँ उगता है वहाँ अक्सर सबसे प्रमुख पौधा होता है।
झाड़ियों से बाग़ानों तक
इस पौधे का सबसे पुराना दर्ज इस्तेमाल उत्तरी न्यू साउथ वेल्स के बुंदजालुंग लोगों का है। व्यावसायिक इस्तेमाल 1920 के दशक में शुरू हुआ, जब रसायनशास्त्री आर्थर पेनफ़ोल्ड ने ऑस्ट्रेलियाई सुगंधित तेलों की कारोबारी संभावनाओं का अध्ययन किया और टी ट्री तेल को होनहार पाया। ये विवरण कि दूसरे विश्व युद्ध में ऑस्ट्रेलियाई सैनिक यह तेल अपने किट में रखते थे, अब तक पुष्ट नहीं हैं। युद्ध के बाद उत्पादन घट गया, फिर 1970 के दशक में दिलचस्पी लौटी और बाग़ान, जिनमें से कई न्यू साउथ वेल्स में हैं, बड़ी मात्रा में तेल बनाने लगे।
दो अलग-अलग टी ट्री
उलझन नाम से पैदा होती है। चाय का पौधा, Camellia sinensis, एक अलग कुल, Theaceae, का है, और कभी-कभी उसे भी टी ट्री कहा जाता है। Melaleuca मर्टल कुल का है, जिसमें यूकेलिप्टस, लौंग और अमरूद भी आते हैं। इसका अंग्रेज़ी नाम शायद कैप्टन जेम्स कुक से आया, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की ऐसी ही एक झाड़ी का वर्णन किया, जिससे वे चाय की जगह एक पेय बनाते थे। आज ‘टी ट्री’ नाम ऐसे कई पौधों के लिए इस्तेमाल होता है।
स्रोत: en.wikipedia.org › Melaleuca alternifolia ↗ · en.wikipedia.org › Tea tree oil ↗ · plantnet.rbgsyd.nsw.gov.au ↗ · pmc.ncbi.nlm.nih.gov ↗ · en.wikipedia.org › Camellia sinensis ↗