मोर (भारतीय मोर) असल में कहाँ से है?
भारतीय मोर भारतीय उपमहाद्वीप से आता है, जहाँ यह आज भी भारत और श्रीलंका के ज़्यादातर हिस्सों में जंगली रहता है। नर, यानी मोर, भारत का राष्ट्रीय पक्षी है, और उसके चमचमाते पंखों की लंबी झालर चार्ल्स डार्विन के समय से वैज्ञानिकों को हैरान करती रही है।
भारत और श्रीलंका का पक्षी
भारतीय मोर भारतीय उपमहाद्वीप का मूल निवासी है। यह भारत के ज़्यादातर हिस्सों में रहता है, उत्तर-पश्चिम में सिंधु घाटी से उत्तर-पूर्व में असम तक और हिमालय से दक्षिणी छोर तक, और श्रीलंका के ज़्यादा सूखे निचले इलाक़ों में भी। इसे खुले जंगल, पानी के पास की झाड़ीदार ज़मीन और खेत पसंद हैं। छोटे झुंड, आम तौर पर एक मोर और तीन से पाँच मोरनियाँ, ज़मीन पर बीज, फल, कीड़े और छोटे सरीसृप खाते हैं, फिर रात बिताने के लिए ऊँचे पेड़ों पर उड़ जाते हैं।
पश्चिम में एथेंस और उससे आगे
इंसान बहुत पहले मोरों को उनके घर से दूर ले गए, और 450 ईसा पूर्व तक ये पक्षी एथेंस पहुँच चुके थे। लैटिन में इस पक्षी को pavo कहा गया, जिससे पुरानी अंग्रेज़ी का pawa बना, और अंग्रेज़ी शब्द peacock लगभग 1300 में दिखता है। मध्ययुगीन यूरोप में मोर निजी चिड़ियाघरों और बड़ी जागीरों के बग़ीचों में पाले जाते थे, और शूरवीर अपने टोपों को मोरपंखों से सजाते थे। आज दुनिया के कई हिस्सों में फिर से जंगली हो चुके मोरों के झुंड रहते हैं, और चिड़ियाघर, पार्क और पक्षी-प्रेमी प्रजनन के लिए मोर पालते हैं।
वह झालर जिसने डार्विन को उलझाया
मोर की मशहूर ‘पूँछ’ असल में बहुत लंबे पंखों की एक झालर है, यानी पूँछ को ऊपर से ढकने वाले पंख, जो उसकी पीठ के निचले हिस्से से उसकी असली पूँछ के ऊपर उगते हैं। इनमें से लगभग 200 पंख, जिनमें से ज़्यादातर के सिरे पर आँख जैसा चंद्रक होता है, मोरनियों को रिझाने के लिए पंखे की तरह उठाए और थरथराए जाते हैं। इनके रंग रंगद्रव्य से नहीं, बल्कि पंखों की बारीक उपशाखाओं में बनी नन्ही, नियमित संरचनाओं से आते हैं, जो रोशनी के कुछ ख़ास रंगों को परावर्तित करती हैं। डार्विन को ऐसे बोझ का कोई फ़ायदा नहीं दिखा, और उन्होंने लिखा कि मोर का पंख देखकर उनका जी मिचलाने लगता है। उनका जवाब, यौन चयन, आज भी बहस का विषय है।
स्रोत: en.wikipedia.org ↗ · knowindia.india.gov.in ↗ · pnas.org ↗ · etymonline.com ↗