केंते कपड़ा असल में कहाँ से है?
केंते कपड़ा घाना से आया है, जहाँ अशांति और एवे बुनकर इसे कम से कम 17वीं सदी से बना रहे हैं। संकरी पट्टियाँ, अक्सर बस हथेली भर चौड़ी, छोटे करघों पर चटकीले डिज़ाइनों में बुनी जाती हैं और फिर किनारे से किनारा मिलाकर सिली जाती हैं, जिससे एक बड़ा कपड़ा बनता है।
अशांति इलाक़े में जन्म
पुरातत्वविदों को दक्षिणी घाना के बेगो और बोनो मानसो जैसे पुराने नगरों में 14वीं से 18वीं सदी तक के तकली के चक्के और रंगाई के गड्ढे मिले हैं। अशांति मौखिक परंपरा केंते की शुरुआत 17वीं सदी में आज के अशांति क्षेत्र के बोनवायर में मानती है, और एक किंवदंती कहती है कि वहाँ के बुनकरों को मकड़ी के जाले से प्रेरणा मिली। 18वीं सदी में डेनिश एजेंटों ने बताया कि राजा ओपोकू वारे के कारीगर आयातित रेशमी तफ़ता के धागे उधेड़ते थे, जबकि उनके बुनकर तीन उँगल चौड़ी पट्टियाँ बनाते थे।
रेशम, रंग और कहावतें
19वीं सदी की शुरुआत तक अशांति का रेशमी केंते पूरी तरह विकसित हो चुका था; 1817 में टॉमस एडवर्ड बोडिच ने ऐसे कपड़ों का वर्णन किया जो ‘अविश्वसनीय आकार और वज़न’ के थे। पट्टियाँ छोटे डबल-हेडल हथकरघे पर बनती हैं और साथ-साथ ऐसे रखी जाती हैं कि उनके डिज़ाइन बारी-बारी से आएँ। हर डिज़ाइन का एक नाम होता है, जो अक्सर किसी कहावत, ऐतिहासिक घटना या सरदार से लिया जाता है। अशांति बुनकर रेशम में ज्यामितीय डिज़ाइन पसंद करते हैं, जबकि वोल्टा क्षेत्र के एवे बुनकर जानवर, इंसान और अक्षर भी जोड़ते हैं।
लोगों को नाइजीरिया क्यों याद आता है
केंते आज घाना से बहुत दूर तक पहना जाता है। इसके डिज़ाइनों के बड़े पैमाने पर छपे प्रिंट पूरे पश्चिम अफ़्रीका में बिकते हैं, और दीक्षांत समारोहों में केंते के स्टोल दिखते हैं, ख़ासकर अफ़्रीकी अमेरिकियों में। पट्टियों में बुना कपड़ा इस बड़े क्षेत्र का एक प्राचीन वस्त्र-प्रकार है, और एवे मौखिक परंपरा कहती है कि उनकी बुनाई 16वीं सदी में शुरू हुई, जब बुनकर पूरब से आकर घाना में बसे प्रवासियों के साथ आए। पर केंते घाना का है: यूनेस्को ने 2024 में इसकी कारीगरी को अपनी सूची में दर्ज किया, और 2025 से सिर्फ़ घाना के मान्यता-प्राप्त समुदायों में बुना कपड़ा ही केंते के नाम से बेचा जा सकता है।
स्रोत: en.wikipedia.org ↗ · collections.vam.ac.uk ↗ · ich.unesco.org ↗