एमोलिएंते (जौ का हर्बल काढ़ा) असल में कहाँ से है?
एमोलिएंते पेरू के लीमा से आया है। भुने जौ, अलसी और जड़ी-बूटियों का यह गर्म काढ़ा, जिसमें आख़िर में नींबू और चीनी डाली जाती है, औपनिवेशिक लीमा के हर्बल जौ-पानी से विकसित हुआ, और ठेलेवाले आज भी तड़के और शाम को इसे अपने ठेलों से बेचते हैं।
‘राजाओं के शहर’ के काढ़े
स्पेनी जौ-पानी को अमेरिका महाद्वीप में लाए, और इतिहासकार ख़ुआन लुइस ओरेगो के अनुसार लीमा में बिकने वाले जौ के एक पेय के रिकॉर्ड औपनिवेशिक काल तक जाते हैं। tisaneras कहलाने वाली महिला विक्रेता मिट्टी के घड़ों में औषधीय जड़ी-बूटियों के काढ़े लेकर लीमा, यानी ‘राजाओं के शहर’, के चौकों में घूमती थीं। पांचो फ़िएरो के 1850 के एक जलरंग चित्र में एक अफ़्रीकी-पेरूवी tisanera सिर पर सुराही लिए दिखती है, और रिकार्दो पाल्मा ने उसकी सुबह की पुकार दर्ज की: ‘La tisanera llegó’।
हर नुक्कड़ पर एक एमोलिएंतेरो
लीमा के रसोइयों ने इन काढ़ों से एमोलिएंते बनाया, और 19वीं सदी के यात्रियों ने राजधानी में इस पेय का ज़िक्र किया। यह इतना लोकप्रिय हुआ कि लगभग हर गली के नुक्कड़ पर एक emolientero, यानी एमोलिएंते बेचने वाला, होता था। ठेले पर लगभग 40 साल बिता चुका एक विक्रेता रात 2 बजे काम शुरू करता है और जौ को कॉफ़ी के बीजों की तरह भूनता है, जिससे पेय को उसका रंग मिलता है। ठेले पर वह कलछी से बेस को कप में डालता है और ऊपर से हॉर्सटेल, अल्फ़ाल्फ़ा या कैट्स क्लॉ जैसी जड़ी-बूटियों के अर्क मिलाता है।
लोग मेक्सिको क्यों सोचते हैं
ठेलों पर बिकने वाले गर्म पेय पूरे लातिन अमेरिका में आम हैं, और बहुत लोग उन्हें मेक्सिको से जोड़ते हैं। पर एमोलिएंते पेरू की परंपरा है, जो लगातार बदलती रहती है: विक्रेताओं ने मुन्या (muña) और एलोवेरा जैसे नए पौधे जोड़े हैं, और गर्मियों में, जब बिक्री 20 या 30 प्रतिशत तक गिर सकती है, कुछ इसे ठंडा परोसते हैं। पेरू के क़ानून 30198 ने तो 20 फ़रवरी को एमोलिएंते और दूसरे पारंपरिक प्राकृतिक पेयों का राष्ट्रीय दिवस बना दिया है।
स्रोत: en.wikipedia.org ↗ · andina.pe ↗ · punchdrink.com ↗ · larepublica.pe ↗